सोमवार, 23 जनवरी 2017

बच्चों के रोने के कारण और उनको संभालने के उपाय

बच्चों के रोने के कारण और उनको संभालने के उपाय



नवजात शिशु में फरिश्तों के समान होते हैं | शहद से भी मीठी किलकारियां, रुई से भी मुलायम गोल मटोल शरीर, खिलते फूलों से भी प्यारा चेहरा | इन के खुश होने पर पूरा घर खुशियों से भर उठता है और कोई भी नहीं चाहता कि यह बच्चे रोए |


आइये इस वीडियो में आपको बच्चों के रोने की कुछ कारण को उनको चुप कराने के कुछ तरीकों के बारे में बताते हैं :-



1) बच्चों के रोने पर अक्सर माता-पिता चिंतित हो जाते हैं | जब बच्चा रो रहा हो तो सबसे पहले उसकी नैपी चेक करें | कई बार नैपी भी गीली होने पर बच्चे असहज महसूस होने पर रोना शुरु कर देते हैं |

2) कई बार जब बच्चा सोते हुए रोने लगे तो चेक करें कि कहीं बेड पर कोई चीज तो नहीं रखी जो उसको चुभ रही हो | कई बार बेडशीट के बेतरतीब होने पर भी बेबी रोना शुरु कर देते हैं |  इसलिए उसके बिछावन को अच्छी तरीके से बिछाय |

3) बच्चे अगर कम कपड़े में हो या कपड़ों से लदे हों तो ठंड या गर्मी महसूस होने पर कई बार असहजता के कारण रोना शुरु कर देते हैं | मौसम को देखते हुए उनके कपड़ों को कम या ज्यादा करें |

4) बेबी जब रो रहा हो तो उसे अपने कंधे से लगा ले | उससे बातें करें या गुनगुना कर कुछ सुनाएं | कई बार असुरक्षा की भावना के कारण बच्चे रोना शुरु कर देते हैं लेकिन अपनी मां का स्पर्श पाते ही वे सामान्य हो जाते हैं |

5) बेबी को सोने के लिए छोड़कर कमरे से बाहर निकलने से पहले उसके बेड पर कुछ सॉफ्ट टॉयज रख दे ताकि नींद खुलने पर खुद को अकेला पाकर वह घबरा कर रोने ना लगे |

6) भूख लगने पर भी बच्चे रोते हैं इसलिए जब बच्चा रोए तो उसे सबसे पहले खाने को कुछ दे |

7) बच्चे को पोटी करने में तकलीफ हो रही हो तो कब्ज हो सकती है | ऐसे में बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं | उसकी डाइट में सब्जी और फलों को शामिल करें | बच्चे को बार बार पोट्टी आ रही हो तो चिकित्सक के पास जाने से पहले उसे जीवन रक्षक घोल पिलाये वरना उसके शरीर में पानी की कमी हो जाएगी | कुछ लोगों की यह धारणा है कि दांत निकलने के दौरान बच्चे का पेट खराब हो जाता है जबकि ऐसा नहीं है | आमतौर पर इस समय बच्चे अपनी उंगलियों को बार-बार मुंह में डालते हैं और इधर उधर की चीजों को भी उठा कर मुंह में रख लेते हैं | इससे संक्रमण होने से पेट खराब हो सकता है |
 फीड कराने वाली मां बच्चे को अपना फीड देती रहे तो और चिकित्सक से संपर्क करें |

8) कई बार बच्चे कान में संक्रमण होने पर जोर जोर से रोना शुरू कर देते हैं और हाथों से कान को खींचने लगते हैं | पेरासिटामोल सिरप से बेबी को रिलीफ मिलेगा लेकिन कान के संक्रमण को ठीक करने के लिए चिकित्सक से मिले |




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शनिवार, 21 जनवरी 2017

स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक भोजन, जल व वायु

Image result for bhojan, jal or vaiyuप्रकृति की सारी संरचनाओं में शरीर की रचना एक बड़ा कठिन, जटिल किंतु बहुत सुंदर विषय है | यह एक बड़ा भारी कल है जिस को चलाने वाली एक शक्ति इसमें रहती है | साधारणतया हम कहते हैं कि यह मेरा शरीर है | इसमें इस बात का आभास होता है कि मैं कोई और है और शरीर कुछ और | 
इस कल को चलने के लिए आवश्यक है संतुलित भोजन, जल व वायु और इस कल द्वारा होने वाले कार्यों के लिए इसे चाहिए बुद्धि का विकास, बल और अवसर | 
जो कुछ भी हम खाते हैं हम उसको भोजन कहते हैं | एक साधारण भ्रम जो जनता में वर्षों से फैला हुआ है कि शरीर को स्वस्थ व बलिष्ठ बनाने के लिए मूल्यवान भोजन की आवश्यकता होती है, इस विचार में कदापि भी सत्यता नहीं है |  भोजन के ज्ञान से निर्धन से निर्धन मनुष्य उसको पोषक तथा बलवर्धक बना सकता है और भोजन की अज्ञानता से धनवान से धनवान मनुष्य उसको विष के समान बना सकता है |  सत्यता इस बात पर है कि उचित समय पर, उचित परिमाण में,  उचित रूप में निश्चित होकर खाया हुआ भोजन सदा ही लाभदायक रहता है | 
यदि निराहार रहकर मनुष्य 20 दिन तक जीवित रह सकता है तो निर्जल व निराहार रहकर केवल 5 दिन तक | कुछ भी हो जल शरीर का एक अति आवश्यक अवयव है | पानी शरीर के भार का 66 प्रतिशत होता है | पानी के बिना जीवित रहना दुर्लभ है | सादा शीतल जल ही शरीर के लिए सदा लाभदायक होता है | बर्फ मिला पानी हानिकारक होता है | दिन भर में मनुष्य को लगभग 3 किलो जल अवश्य इस कल में डालना चाहिए, जिस की मात्रा सर्दी गर्मी में कम या ज्यादा की जा सकती है |
निराहार व निर्जल रहकर तो फिर भी 5 दिन जीवित रहा जा सकता है परंतु वायु के बिना तो एक पल भी जीवित रहना दुर्लभ है | इसी कारण शरीर के लिए वायु अति आवश्यक है | जो मनुष्य बंद कोठियों में और सकरी गलियों में रहते हैं वे सदैव किसी न किसी रोग से ग्रस्त रहते हैं | प्रतिदिन दो चार बार शुद्ध वायु में आकर 2-4 लंबी-गहरी श्वास लेने से बहुत से रोगों के होने की संभावना समाप्त हो जाती है | 
यह वह वस्तुए है जो इस शरीर रूपी कल के चलते रहने के लिए आवश्यक है | जिनकी सहायता से यह चलती हुई कल महान से महान कार्य कर सकती है |

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जोड़ो का दर्द जब जब सताये तो ये तरिके अपनाये

जोड़ो का दर्द जब जब सताये तो ये तरिके अपनाये :-


गलत खान पान की वजह से आज कल तक़रीबन सभी लोग जोड़ों के दर्द के रोग से पीड़ित है | इस वीडियो में जोड़ों के दर्द को दूर करने के कुछ आयुर्वेदिक उपाय बताने जा रहे है |

1)  लहसुन पीस कर लगाने से बदन के हर अंग का दर्द जाता रहेगा, किंतु इसे जल्द हटा लेना चाहिए नहीं तो फफोले पड़ने का भय रहता है |

2)  राई को पीसकर उसका लेप करने से हर दर्द मिट जाता है |

3)  गठिया के दर्द में अरंडी का छिला हुआ बीज पहले दिन एक, दूसरे दिन में दो, इस प्रकार सात बीज तक खाये फिर प्रतिदिन एक-एक कम करके एक बीज पर ले आए | इसे गठिया का दर्द हमेशा के लिए गायब हो जाएगा |

4) अजवायन को पानी में डालकर पका लें और उस पानी की भाप दर्द वाले स्थान पर दें | देखते ही देखते दर्द काफूर हो जाएगा |

5)  कड़वे तेल में अजवायन और लहसुन जलाकर उस तेल की मालिश करने से हर प्रकार के दर्द से छुटकारा मिल जाएगा | 


6)  कनेर की पत्ती उबालकर पीस लें और मीठे तेल में मिलाकर लेप करें | इससे दर्द जाता रहेगा |





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सोमवार, 16 जनवरी 2017

प्याज के गुणों का भरपूर फायदा लेने के लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखे |...


भोजन में अति प्राचीन काल से प्याज का उपयोग होता रहा है | प्याज शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अति उत्तम है | प्याज वात, पित्त और कफ, इन तीनों विकारों में गुणकारी है | 


मगर सभी औषधियों की तरह इसका प्रयोग भी संभलकर करना चाहिए नहीं तो प्याज कई बीमारियों का कारण बन सकता है |

पाचन शक्ति और प्रकृति का ख्याल रखकर ही प्याज का उपयोग करना चाहिए | कुछ व्यक्ति प्याज के पोषक तत्व को पचा नहीं सकते | प्याज के उपयोग से उन्हें गैस हो जाती है | उन्हें प्याज को पचाने के लिए ज्यादा श्रम करना चाहिए या प्याज का कम मात्रा में उपयोग करना चाहिए | 

प्याज का अत्याधिक और निरंतर सेवन करने से रक्त तप जाता है और फोड़े, फुंसियां होने की संभावना रहती है | वीर्य पतला पढ़कर स्खलित हो जाता है | 

प्याज और दूध का एक साथ सेवन नहीं करना चाहिए | प्याज और दूध इन दोनों के सेवन के बीच में कम से कम 3-4 घंटे का अंतर होना चाहिए | दूध पीने के पहले या बाद में तुरंत ही प्याज खाने से कोढ़, रक्त दोष आदि विकार हो सकते हैं | 

आंखें दुखती हो तब भी प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए | इससे आंखों की पीड़ा और बढ़ जाती है | 

प्याज को वायु नाशक माना गया है परंतु उस को पकाने, उस की सब्जी बनाने से वह वायु कारक बन जाता है जबकि कच्चा प्याज वायु नहीं करता |

काफी वक्त से काट कर रखे हुए प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए | प्याज को काटकर तुरंत ही खा लेना चाहिए काट कर रख छोड़ने पर उसमें रहा हुआ तत्व उड़ जाते हैं |

ऊपर बताई गई बातों का ध्यान रखकर हम गुणकारी प्याज के गुणों का भरपूर फायदा उठा सकते हैं | 

धन्यवाद





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रविवार, 15 जनवरी 2017

कब्ज दूर करने के 12 घरेलु उपाय



कब्ज दूर करने के 12 घरेलु उपाय


1) यदि आप बिना छाने आटे की मोटी-रोटी चबा-चबा कर खाएं तो कभी कब्ज नहीं होगी |

2) 20 ग्राम त्रिफला रात को ढाई सौ ग्राम पानी में भिगोकर रखें सुबह शौच क्रिया करने के पूर्व त्रिफला का निथरा हुआ जल पिए | कब्ज दूर हो जाएगी |

3) कुट्टी हुई हरहड़ रात को फाँक कर ढाई सौ ग्राम गुनगुना पानी पीने से सुबह उठते ही पेट साफ हो जाएगा | 

4) गाजर, मूली, शलगम, टमाटर, पालक की पत्तियां, चौलाई और बीट की पत्तियों के सलाद में नारियल की गिरी के छोटे-छोटे टुकडे मिलाकर, भोजन के साथ या उसके बाद खाएं, पुराना कब्ज भाग जाएगा |

5) 7-8 अंजीर लेकर गर्म पानी में उबालकर उस का काढ़ा बना ले | रात को सोते समय यह काढ़ा पिएं | तीन-चार दिनों तक लगातार पीने से कब्ज की शिकायत हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी | पर यदि अधिक दस्त आने लगे तो काढ़ा पीना तुरंत  बंद कर दें |

6) सुबह उठकर खाली पेट दो सेब दांतो से काट कर खाए | कब्ज नहीं रहेगा |

7) बारीक कपड़े पर पुल्टिस की तरह गीली मिट्टी लपेट कर रात भर अपने पेट के निचले हिस्से पर रखिए | अवश्य लाभ होगा |

 8) रात को सोने से पहले एक चम्मच शहद एक गिलास ताजे  पानी में मिलाकर पिएं कब्ज नहीं रहेगा |

9) प्रातः काल बिना कुछ खाए 10 दाने काजू , 5 दाने मुनक्का खाने से कब्ज दूर होता है |

10) रात को नींबू काट कर रख दे | सवेरे उस की शिकंजी बना कर पी लें | इसे पीने से कब्ज दूर होगा |

11) दो बड़े पीले पके संतरों का रस सुबह नाश्ते से भी पहले पिए | एक हफ्ते में पुराने से पुराना कब्ज दूर हो जाएगा |

12) खाना खाने के एकदम बाद एक कप गरमा गरम उबलता हुआ पानी घूंट-घूंट करके पीने से कब्ज और पेट से संबंधित शिकायतें दूर होती है |



खाली पेट काजू और शहद खाने के फायदे 
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सोमवार, 9 जनवरी 2017

लहसुन के रस से बनने वाली 7 औषधिया और उनके लाभ

लहसुन को कई तरीकों से इस्तेमाल में लाया जा सकता है और हर एक तरीके से लहसुन गुणकारी गुणकारी ही है |


दुबले व्यक्तियों को असगंध के चूर्ण के साथ गले के रोगों में मुलेठी के साथ गुल्म यानी ट्यूमर के रोगी को तिल के तेल के साथ, T.B.  यानी छय के रोगी को घी और दूध के साथ, अर्श यानि बवासीर के रोगी को कुटज की छाल के साथ, पेट के कीड़ों के इलाज के लिए बायविडंग के चूर्ण के साथ, खांसी और सांस के रोगी को त्रिफला के चूर्ण के साथ लहसुन का सेवन हितकारी होता है |

लहसुन का रस कई स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों को दूर करने में लाभदायक होता है | इस वीडियो में लहसुन के रस से बनने वाली औषधियों के तरीकों और उनके लाभ के बारे में जानकारी देंगे |


  1. आधासीसी यानी आधे सिर के दर्द में लाभकारी औषधि बनाने का तरीका 
  2. जख्म को ठीक करने में लाभदायक औषधि बनाने का तरीका 
  3. क्षयरोग यानी टीबी की लाभकारी औषधि बनाने का तरीका 
  4. काली खांसी की रामबाण औषधि बनाने का तरीका 
  5. दाद को मिटाने की औषधि बनाने का तरीका 
  6. दमा और सांस के रोगों की लाभकारी औषधि बनाने का तरीका  
  7. सर्दी जुकाम का रामबाण औषधि बनाने का तरीका 



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